Mahabharat Rahasya, अनसुनी, अनकही महाभारत कथा 1

Rishabh

एक बार की बात है, धृतराष्ट्र और पांडु के बीच भाईचारे की वाद-विवाद की बात चल रही थी। दोनों भाइयों ने आपसी युद्ध का विचार किया, जिससे कि वे अपनी सत्ता को सुरक्षित कर सकें और अपनी आदर्श राजनीति चला सकें। धृतराष्ट्र अपने पुत्र दुर्योधन का समर्थन कर रहे थे, जबकि पांडु अपने पांच पुत्रों के साथ धर्म की रक्षा करने के लिए खड़े थे।

महाभारत का युद्ध आरंभ होने वाला था, जबकि जब तक कि वह आयोध्या में वास कर रहे थे, वह उस युद्ध में भाग नहीं ले सकते थे। पांडु बहुत चिंतित थे क्योंकि वे अपने पुत्रों को युद्ध में उत्तेजित नहीं करना चाहते थे।

इस बीच, पांडु को युद्ध के लिए एक अनोखा आयाम मिला। वे दूत के रूप में कपिश्चर नामक एक महान वृक्ष के पास गए। कपिश्चर एक अत्यधिक बुद्धिमान और ज्ञानी वृक्ष था, जिसने बहुत सारे रहस्यों को जाना था।

पांडु ने कपिश्चर से युद्ध के बारे में सलाह ली। कपिश्चर ने कहा, “यदि तुम्हें अपने पुत्रों के लिए विजय चाहिए, तो तुम्हें एक गुप्त युद्ध रचना चाहिए। इसके लिए तुम्हें द्रौपदी की सहायता लेनी चाहिए।”

पांडु ने इस उपाय को अपनाने का फैसला किया और उन्होंने द्रौपदी से मदद मांगी। द्रौपदी, जो स्वयं महानीय स्वभाव वाली थी, स्वीकार करने से पहले पूछा, “मुझे तुम्हारी मदद क्यों करनी चाहिए?”

पांडु ने उसे युद्ध की सच्चाई बताई और अपने पुत्रों के लिए उसकी मदद की अपील की। द्रौपदी ने विनयपूर्वक स्वीकार किया और उन्होंने अपनी पांचों पतियों के रूप में युद्ध में उतरने का निर्णय लिया।

जब युद्ध का दिन आया, तो द्रौपदी ने पांडवों को अपनी सभा में बुलाया। उन्होंने प्रत्येक पति को एक अलग-अलग रूप दिया और कहा, “तुम अपने धनुष उठाओ और युद्ध में अपनी विजय के लिए अभियान करो।”

इस रूप में, द्रौपदी ने गुप्त रूप से पांडवों की सेना को विजय का अवसर दिया। इस अनसुनी कथा ने महाभारत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां द्रौपदी ने अपने सामरिक और युद्धास्त्रों के जरिए पांडवों को समर्थ बनाया। वास्तव में, यह कथा एक सत्यापन के रूप में हिंदी साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आम तौर पर अनजाने में छिपी रहती है।

Leave a Comment

Scroll to Top